बिहार में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ का संकट अत्यंत गंभीर रूप ले चुका है। राज्य के जल संसाधन विभाग (WRD) और आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गंगा, गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में भारी वृद्धि से 16 ज़िले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनमें से राजधानी पटना सहित 14 ज़िलों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है
बिहार में बाढ़ का कहर: नदियों के उफान से 16 जिले जलमग्न
बिहार में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नेपाल से आ रहे पानी के कारण गंगा, गंडक और कोसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 16 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे 50 प्रखंडों और 201 ग्राम पंचायतों की लगभग 10.26 लाख से अधिक आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। पटना, सारण, भागलपुर और खगड़िया समेत 14 जिलों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां बाढ़ का पानी निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है।
पटना में गंगा नदी ने अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और यह खतरे के निशान से लगभग दो मीटर ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 10 बजे तक, पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जिसने 21 अगस्त 2016 के 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम रिकॉर्ड (HFL) को पार कर लिया है। विभाग के अनुसार, इसके 50.62 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा, दीघा घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.17 मीटर (51.68 मीटर) और हाथीदह में 1.32 मीटर (43.24 मीटर) ऊपर बह रही है, जिससे राजधानी पर बाढ़ का खतरा और गहरा गया है।
राज्य की अन्य प्रमुख नदियों की स्थिति भी चिंताजनक है:
पुनपुन नदी: श्रीपालपुर में खतरे के निशान से 2.29 मीटर ऊपर बह रही है।
गंडक और कोसी: डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक, तथा बलतारा में कोसी नदी लाल निशान के पार हैं।
अन्य नदियां: खगड़िया में बूढ़ी गंडक और सीवान के दरौली में घाघरा नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर हैं। दरधा नदी का तटबंध टूटने से धनरुआ में दर्जनों घरों में पानी घुस गया है और फसलें बर्बाद हो गई हैं।
इस विनाशकारी बाढ़ का मुख्य कारण सितंबर महीने में हुई अप्रत्याशित बारिश है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69% अधिक है। इसके साथ ही नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश ने नदियों के बहाव को और तेज कर दिया है, जिससे बक्सर से लेकर भागलपुर तक तटबंधों पर भारी दबाव बन गया है।
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया है और सभी संबंधित जिलाधिकारियों को राहत व बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। पटना नगर निगम और जिला प्रशासन को तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी करने, गश्ती बढ़ाने और नदी किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया है।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। ज़मीनी स्तर पर मदद सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
बचाव कार्य के लिए NDRF की 7 और SDRF की 27 टीमें तैनात की गई हैं।
यातायात और सुरक्षित निकासी के लिए 858 नावों का संचालन किया जा रहा है।
लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 38 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं।
अब तक 12,300 पॉलीथीन शीट और 2,250 सूखा राशन पैकेट बाढ़ पीड़ितों के बीच वितरित किए जा चुके हैं।
Comments :0