किशनगंज: सीमावर्ती किशनगंज जिले में सेना की मौजूदगी और सामरिक गतिविधियों को लेकर आने वाले दिनों में बड़ी तस्वीर देखने को मिल सकती है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में दो अलग-अलग स्थानों पर भारतीय सेना के स्थायी कैंप स्थापित किए जाने की तैयारी है। ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी में आर्मी कैंप का बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, दूसरे प्रस्तावित कैंप के लिए पहले चर्चा में रहे सकोर-नटुआपाड़ा की जगह अब ठाकुरगंज प्रखंड के सरायकुड़ी का चयन किए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां करीब 190 एकड़ भूमि पर सेना का स्थायी कैंप स्थापित किए जाने की योजना बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सरायकुड़ी में प्रस्तावित सेना कैंप के लिए स्थान का चयन उसकी भौगोलिक स्थिति और सड़क संपर्क को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह स्थल किशनगंज-बहादुरगंज मुख्य मार्ग पर डे मार्केट से पोवाखाली जाने वाले रास्ते में पड़ता है। इसके अलावा यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग NH-327E की दूरी भी काफी कम है। सड़क संपर्क की बेहतर सुविधा और सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंच की दृष्टि से इस स्थान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सकोर-नटुआपाड़ा में उपजाऊ जमीन को लेकर हुआ था विरोध
गौरतलब है कि इससे पहले बहादुरगंज और कोचाधामन अंचल की सीमा से जुड़े सकोर, सतभीट्टा और नटुआपाड़ा मौजा में करीब 200 एकड़ से अधिक भूमि पर सेना कैंप स्थापित किए जाने का प्रस्ताव चर्चा में था। प्रस्तावित जमीन का बड़ा हिस्सा उपजाऊ कृषि भूमि बताया जा रहा था, जहां बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। सेना कैंप के लिए जमीन चिह्नित किए जाने और संभावित अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय किसानों में नाराजगी सामने आई थी। किसानों ने अपनी खेती योग्य जमीन बचाने और कैंप के लिए किसी दूसरे स्थान का चयन करने की मांग उठाई थी।
AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने भी जताई थी आपत्ति
इस मुद्दे पर बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र के AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने भी खुलकर आपत्ति जताई थी। 24 दिसंबर 2025 को इस मामले को लेकर उन्होंने किशनगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। विधायक का कहना था कि जिस जमीन को सेना कैंप के लिए चिह्नित किया गया है, वह उपजाऊ कृषि भूमि है और उस पर सैकड़ों किसानों की आजीविका निर्भर है।
उन्होंने चिंता जताई थी कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में खेती योग्य जमीन का अधिग्रहण किया गया तो किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। विधायक ने स्पष्ट किया था कि उनका विरोध सेना या देश की सुरक्षा को लेकर नहीं है, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन को बचाने का है। उन्होंने मांग की थी कि सेना कैंप के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन किया जाए, ताकि किसानों की खेती और आजीविका प्रभावित न हो।
इस मुद्दे पर स्थानीय किसानों की आपत्तियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाई गई मांगों के बाद अब सरायकुड़ी में करीब 190 एकड़ जमीन पर सेना कैंप स्थापित किए जाने की नई जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, सकोर-नटुआपाड़ा से सरायकुड़ी में प्रस्तावित स्थल बदलने के पीछे यही विरोध आधिकारिक कारण रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सरायकुड़ी की भौगोलिक स्थिति क्यों है महत्वपूर्ण?
सरायकुड़ी ठाकुरगंज प्रखंड में स्थित है। यह किशनगंज-बहादुरगंज मुख्य मार्ग पर डे मार्केट से पोवाखाली जाने वाले रास्ते में पड़ता है और कोचाधामन व बहादुरगंज प्रखंड का बार्डर भी है। यहां से NH-327E की नजदीकी भी इस स्थल को सड़क संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। प्रस्तावित 190 एकड़ जमीन पर यदि सेना का स्थायी कैंप स्थापित होता है तो यह जिले में सेना की मौजूदगी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
भेलागुड़ी और सरायकुड़ी, दो अलग-अलग स्थानों पर सेना के ठिकाने
ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी और सरायकुड़ी में प्रस्तावित दोनों सेना कैंप यदि धरातल पर उतरते हैं तो किशनगंज जिले के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। सीमावर्ती जिला होने के कारण सामरिक दृष्टिकोण से किशनगंज की भौगोलिक स्थिति काफी अहम है। ऐसे में जिले में दो अलग-अलग स्थानों पर सेना के स्थायी ठिकानों की स्थापना से क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता और बढ़ सकती है। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर आधारभूत सुविधाओं, सड़क संपर्क और आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावनाएं बन सकती हैं।
फिलहाल भेलागुड़ी में सेना कैंप का निर्माण तय होने और सरायकुड़ी में 190 एकड़ भूमि के चयन की जानकारी विश्वस्त सूत्रों पर आधारित है। इस संबंध में आधिकारिक घोषणा, भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना और प्रशासनिक पुष्टि का इंतजार है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीमावर्ती किशनगंज में सेना के इन प्रस्तावित ठिकानों को लेकर आगे क्या आधिकारिक निर्णय सामने आता है।
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