भारतीय पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। शुक्रवार को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में मोना ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए स्वर्ण पदक पर निशाना साधा। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में यह उनका दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में भी खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

38 वर्षीय मोना ने फाइनल मुकाबले में 357.5 का ऐतिहासिक स्कोर बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। उन्होंने स्वीडन की अन्ना बेंसन के 356 अंकों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो इसी साल जुलाई में बनाया गया था। इस स्पर्धा में चीन की झांग कुइपिंग ने 353.7 अंकों के साथ रजत और दक्षिण कोरिया की किम मियुंग ने 344.4 अंकों के साथ कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। वहीं, भारत की एक अन्य स्टार निशानेबाज अवनि लेखरा 333.2 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहीं।

मोना का प्रदर्शन पूरे मुकाबले के दौरान बेहद सधा हुआ रहा। उन्होंने नीलिंग सीरीज में 101.4 अंक के साथ बेहतरीन शुरुआत की और प्रोन सीरीज के बाद 203.5 के स्कोर तक पहुंचीं। इसके बाद स्टैंडिंग सीरीज में उन्होंने अपनी लय बरकरार रखते हुए लगातार शानदार निशाने लगाए और अंततः 357.5 के स्कोर के साथ विश्व रिकॉर्ड कायम किया। एसएच1 श्रेणी विशेष रूप से उन एथलीटों के लिए होती है जिनके अंगों में अक्षमता होती है, लेकिन वे बिना किसी गन स्टैंड या बाहरी सहारे के अपने हाथों से राइफल का वजन संभाल सकते हैं।

मोना अग्रवाल का सफर संघर्ष और अदम्य जज्बे की एक बड़ी मिसाल है। राजस्थान के सीकर में जन्मीं और वर्तमान में जयपुर में रहने वाली मोना को महज नौ महीने की उम्र में ही पोलियो हो गया था, जिसके कारण उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, दो बच्चों की मां मोना ने अपनी इस शारीरिक चुनौती को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। शॉटपुट, चक्काफेंक, भालाफेंक और भारोत्तोलन जैसे खेलों में हाथ आजमाने के बाद उन्होंने दिसंबर 2021 में निशानेबाजी की दुनिया में कदम रखा। 2023 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण करने वाली मोना ने पेरिस पैरालंपिक में भी कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया था और अब एशियाई पैरा खेलों में उनका यह दबदबा उनकी असाधारण प्रतिभा को साबित करता है।