शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए उनसे नई तकनीक अपनाने, अपना ज्ञान लगातार बढ़ाने और शिक्षण के नए तरीकों का उपयोग करने का आह्वान किया है। पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती (5 सितंबर) पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने, उनके चरित्र निर्माण और उनमें स्वतंत्र सोच व जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. राधाकृष्णन, जो भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे, का मानना था कि उनका जन्मदिन व्यक्तिगत रूप से मनाने के बजाय 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।
राष्ट्रपति का यह संदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दृष्टिकोण के भी पूरी तरह अनुकूल है, जो रटने वाली शिक्षा के बजाय विश्लेषणात्मक सोच, रचनात्मकता और तकनीक-आधारित व्यावहारिक ज्ञान पर जोर देती है, जिसका नेतृत्व शिक्षकों को ही करना है। इसी दिशा में शिक्षकों के अद्वितीय योगदान को सम्मानित करने के लिए, राष्ट्रपति नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रतिष्ठित समारोह में उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी।
इस वर्ष 27 राज्यों, सात केंद्र शासित प्रदेशों और छह केंद्रीय सरकारी संस्थानों से चुने गए 48 स्कूली शिक्षकों के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षकों व प्राध्यापकों को यह सम्मान दिया जाएगा। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की एक पारदर्शी एवं तीन-स्तरीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए प्रत्येक विजेता को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रभाव के लिए एक प्रमाण पत्र, 50,000 रुपये की नकद राशि और एक रजत पदक प्रदान किया जाएगा।
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