किशनगंज। पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस को व्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया गया। आचार्य महाश्रमण की अनुकम्पा से किशनगंज में उपासक महावीर दुगड़ और उपासक झब्बर दुगड़ का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र के मंगलाचरण से हुई। इसके बाद महिला मंडल की सदस्यों ने अणुव्रत दिवस की गीतिका प्रस्तुत की।
उपासक झब्बर दुगड़ ने अणुव्रत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से जीवन को संयमित और संस्कारित बनाया जा सकता है। अणुव्रत व्यक्ति को आचरण की शुद्धता, नैतिक मूल्यों, संयम और अनुशासन की प्रेरणा देता है। उपासक महावीर दुगड़ ने लेश्या विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि व्यक्ति के भावों और विचारों का प्रभाव उसके जीवन तथा व्यवहार पर पड़ता है। उन्होंने शुभ और शुद्ध भावों के विकास तथा नकारात्मक भावों से दूर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पर्युषण के दौरान आत्मावलोकन कर भावों, विचारों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में अणुव्रत के 11 नियमों का वाचन किया गया। इस अवसर पर अणुव्रत समिति के सदस्यों ने नशामुक्त परिवार और अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह से संबंधित बैनर का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अणुव्रत के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने और आत्मसंयम के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
Comments :0