नई दिल्ली। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर कहा कि पर्यावरण का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए गिद्धों का संरक्षण बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने गिद्धों को प्रकृति की अपनी ‘क्लीनअप टीम’ बताया और नागरिकों से इनकी सुरक्षा का संकल्प दोहराने की अपील की।
 
श्री यादव ने कहा कि गिद्ध मरे हुए जानवरों के शवों को तेजी से साफ करके इकोसिस्टम को स्वच्छ रखते हैं। इससे बीमारियां फैलने से रुकती हैं और पर्यावरण का संतुलन बना रहता है। उन्होंने कहा कि ये पक्षी दिखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन प्रकृति के चक्र में इनकी भूमिका बहुत बड़ी है। सरकार गिद्धों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठा रही है, ताकि ये एक बार फिर देश के आसमान में उड़ सकें।गिद्धों की संख्या भारत में पिछले तीन दशकों में भारी गिरावट देखी गई है। सबसे बड़ा कारण पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली दवा डाइक्लोफेनेक रही, जो मवेशियों के शरीर में रह जाती थी। गिद्ध जब ऐसे शव खाते थे तो उनकी किडनी फेल हो जाती थी। सरकार ने 2006 में पशुओं के लिए डाइक्लोफेनेक पर रोक लगाई थी, लेकिन दो दशक बाद भी संख्या पूरी तरह नहीं सुधरी है। अब अन्य दर्द निवारक दवाएं, जहर, बिजली के तारों से टकराना और आवास का घटना भी खतरा बने हुए हैं।
 
भारत में सफेद पीठ वाला गिद्ध, भारतीय गिद्ध और पतली चोंच वाला गिद्ध जैसी कई प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त मानी जाती हैं। इनके संरक्षण के लिए बंदी प्रजनन केंद्र चलाए जा रहे हैं और कुछ क्षेत्रों को गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। पालतू पशुओं के इलाज में सुरक्षित दवाओं के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है, क्योंकि यही सबसे बड़ा खतरा रहा है।
 
अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस हर साल सितंबर के पहले शनिवार को मनाया जाता है। इस साल यह 5 सितंबर को पड़ा। देशभर के चिड़ियाघरों, वन विभागों और संरक्षण संस्थाओं ने इस मौके पर जागरूकता कार्यक्रम रखे। कानपुर, बीकानेर और कई अन्य जगहों पर पक्षी अवलोकन, प्रदर्शनी और छात्रों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए।
 
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिर्फ सरकारी कदम काफी नहीं हैं। गिद्धों के आवास बचाने, उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली दवाओं से दूर रहने और इकोसिस्टम के नाजुक संतुलन को बनाए रखने में हर नागरिक की भूमिका है। उनका संदेश साफ था कि गिद्ध सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण की जरूरी कड़ी हैं।