कुमेदपुर से आमबाड़ी फालाकाटा के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण रेल परियोजना की आधारशिला रखी जा चुकी है। 51 हज़ार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से यह परियोजना पूरी की जाएगी। इस रेल लाइन का निर्माण पूरी तरह से भूमिगत होगा। बताते चले की कुमेदपुर स्टेशन पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित है तथा आमबाड़ी फालाकाटा
पश्चिम बंगाल के ही जलपाईगुड़ी जिले में स्थित एक रेलवे स्टेशन है।यह सिलीगुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) क्षेत्र के काफी करीब है।
क्यो महत्वपूर्ण है चिकन नेक गलियारा-
चिकन नेक (सिलीगुड़ी गलियारा) का अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक महत्व है। चिकन नेक भारत की भौगोलिक संरचना में सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय गलियारा है। इसकी चौड़ाई कई स्थानों पर मात्र 20-25 किलोमीटर (कुछ जगहों पर 17-22 किमी) रह जाती है।
1947 के विभाजन के बाद यह क्षेत्र और अधिक महत्वपूर्ण हो गया। आज यह गलियारा न सिर्फ 4 करोड़ से अधिक लोगों की जीवन रेखा है, बल्कि रक्षा लॉजिस्टिक्स, व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक विकास का भी आधार स्तंभ है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन (चुंबी घाटी) की सीमाओं से घिरे होने के कारण यह क्षेत्र किसी भी भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य संकट या प्राकृतिक आपदा में अत्यधिक जोखिम में रहता है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी कारण से यह गलियारा बाधित हो जाता है तो पूर्वोत्तर क्षेत्र मुख्य भारतभूमि से पूरी तरह कट सकता है। इन्हीं कारणों से केंद्र सरकार सड़क, रेल, हवाई अड्डे और संचार व्यवस्था को भूमिगत तथा बहु-ट्रैक बनाने की व्यापक योजना पर काम कर रही है।
51 हज़ार करोड़ रुपये से बनेगी 170 किमी अंडरग्राउंड डबल लाइन-
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबन्धक चेतन श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया की कुमेदपुर –आमबाड़ी फालाकाटा भूमिगत डबल लाइन अभी बेहद शुरुआती दौर में है। इसके सर्वे के लिए महाराष्ट्र की मोनार्क एजेंसी को काम सौंपा गया है। उन्होंने बताया की इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 170 किमी होगी। जिसमे 124.32 किमी क्षेत्र पश्चिम बंगाल और 45.68 किमी क्षेत्र बिहार के अंतर्गत होगा। इस प्रोजेक्ट पर कुल अनुमानित लागत 51000 करोड़ रुपये होगी। रेलवे बोर्ड के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की बोर्ड स्तर पर इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वे की स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2024-25 में दी गई थी। न्यूज़वर्स के पास उपलब्ध डॉक्यूमेंट्स ये बताते है कि 5 दिसंबर 2024 को इस हेतु कार्य आदेश जारी किया गया था। वर्तमान में भू-तकनीकी जांच, ब्लास्ट-प्रूफ टनल डिजाइन और आदि कार्य चल रहे हैं।
तिनमाइल हाट – रंगापानी – बागडोगरा भी बनेगी नई भूमिगत लाइन-
इस प्रस्तावित परियोजना की कुल लंबाई: 35.76 किमी होगी जिसमे मुख्य खंड धुमडांगी –रंगापानी होगा। इस रेलखंड की लंबाई 33.40 किमी होगी। यह लाइन बागडोगरा एयर फोर्स स्टेशन और बेंगडुबी आर्मी कैंटोनमेंट (33 कोर) के निकट होने के कारण एयर-रेल लॉजिस्टिक्स एकीकरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस रेल लाइन के निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया हेतु बजट 2026-27 में प्रावधान किए गए है।
आधुनिक तकनीकी विशेषताएं-
दोनों परियोजनाओं में विश्व स्तरीय तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसमें 2×25 kV AC विद्युतीकरण प्रणाली, स्टैंडर्ड-IV ऑटोमैटिक सिग्नलिंग, VOIP आधारित OFC और क्वाड केबल संचार व्यवस्था, RDSO 25 टन एक्सल लोड मानकों के अनुसार पुल, Tunnel Boring Machine (TBM) और NATM पद्धति से दोहरी सुरंगें, पूरी तरह ब्लास्ट-प्रूफ और आपदा-रोधी डिजाइन तैयार किए जाएँगे।
इन रेल परियोजनाओं के अतिरिक्त चिकन नेक में समानांतर सड़क परियोजनाओं पर भी तेज गति से काम हो रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में सात महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग खंड NHAI और NHIDCL को सौंप दिए हैं, जिनमें NH-31, NH-33, NH-312, सेवोक-कोरोनेशन ब्रिज, हासीमारा-जयगांव आदि शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं भारतमाला, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं।
ये परियोजनाएं भारतीय रेलवे की आधुनिकिकरण, पूर्वोत्तर के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का अभिन्न अंग हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बार-बार चिकन नेक को अजेय बनाने पर विशेष जोर दिया है।
स्थानीय जनता, रणनीतिक विश्लेषक, पूर्वोत्तर राज्यों के नेता और रक्षा विशेषज्ञों ने इन परियोजनाओं का व्यापक स्वागत किया है। वर्तमान में भू-तकनीकी अध्ययन और डिजाइन कार्य तेजी से चल रहे हैं। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इन परियोजनाओं को 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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