भारतीय रेलवे द्वारा हाल ही में 19427/19428 भुज-बरौनी अमृत भारत एक्सप्रेस को मंजूरी दी गई है, लेकिन इसकी रूपरेखा और समय-सारणी सामने आते ही रेल विशेषज्ञों और यात्रियों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। आधुनिक तकनीक और पुश-पुल प्रणाली से लैस अमृत भारत ट्रेनों का मकसद आम यात्रियों को तेज और किफायती सफर देना था, लेकिन यह ट्रेन अपने बेहद घुमावदार मार्ग और धीमी गति के कारण एक 'सुस्त पैसेंजर' जैसी नजर आ रही है।

50 घंटे से ज्यादा का सफर और 40 से अधिक ठहराव

इस ट्रेन का मार्ग भुज से शुरू होकर अहमदाबाद, रतलाम, कोटा, मथुरा, कासगंज, बरेली, पीलीभीत, मैलानी, सीतापुर, गोंडा, गोरखपुर, छपरा और मुजफ्फरपुर होते हुए बरौनी तक तय किया गया है। इतने लंबे घुमावदार रूट और दर्जनों छोटे-बड़े स्टेशनों पर ठहराव के चलते यह ट्रेन लगभग 60 घंटे का लंबा समय लेगी। पुश-पुल तकनीक के बावजूद ट्रेन की औसत गति निराशाजनक है, जिससे लंबी दूरी के सीधे यात्रियों को समय की भारी बर्बादी झेलनी पड़ेगी।

3 कीमती अमृत भारत रेक की बर्बादी

इस रूट पर त्रि-साप्ताहिक सेवा संचालित करने के लिए रेलवे पूरे 3 अमृत भारत रेक झोंक रहा है। जहां एक ओर देश के कई व्यस्ततम और औद्योगिक कॉरिडोर में तेज गति वाली गैर-वातानुकूलित ट्रेनों की भारी मांग है, वहीं 3 आधुनिक रेक को एक ऐसे रूट पर फंसाना जहां ट्रेन घंटों रेंगती रहेगी, रेलवे संसाधनों का सरासर दुरुपयोग है।

यदि भुज और बिहार के बीच सीधी कनेक्टिविटी आवश्यक ही थी, तो इसे मथुरा, बरेली और मैलानी के अत्यंत धीमे और घुमावदार मीटर-गेज से ब्रॉड-गेज में बदले रास्तों के बजाय सीधे दिल्ली-कानपुर-दीन दयाल उपाध्याय मुख्य रूट से चलाया जाना चाहिए था। रेलवे बोर्ड को इस फैसले की समीक्षा करनी चाहिए ताकि आधुनिक ट्रेनों की गति और संसाधनों का सही मायनों में उपयोग हो सके।

कई विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन को जानबूझकर यूपी के कई शहरों और कस्बों से घुमाकर निकाला गया है ताकि अधिक से अधिक क्षेत्रों के मतदाताओं को लुभाया जा सके, जिससे यह यात्रियों की सुविधा से अधिक एक खराब 'राजनीतिक ट्रेन' बनकर रह गई है।